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	<title>Shibu Soren : The Dishum Guru</title>
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	<description>Gurujee Ki Yatra</description>
	<pubDate>Wed, 28 Jan 2009 04:14:44 +0000</pubDate>
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		<title>शिबू सोरेन के उत्थान-पतन का अर्थ</title>
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		<pubDate>Wed, 28 Jan 2009 04:14:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
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		<description><![CDATA[- पुष्पेश पंत -
..अगर चारा घोटाले में लिप्त होन के आरोपी और अब तक बाइज्जत बरी न हो सके -लालू यादव या ताज एक्सप्रेसवे समेत दर्जनों बड़े सरकारी निर्माण कार्यों का भंडाफोड़ होने के बावजूद बहन मायावती न केवल मुख्यमंत्री बनी रहती है, बल्कि प्रधानमंत्री बनने का सपना देख सकती हैं तब फिर रोक-टोक गुरु [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>- पुष्पेश पंत -<br />
<!--show=nonsingle-->..अगर चारा घोटाले में लिप्त होन के आरोपी और अब तक बाइज्जत बरी न हो सके -लालू यादव या ताज एक्सप्रेसवे समेत दर्जनों बड़े सरकारी निर्माण कार्यों का भंडाफोड़ होने के बावजूद बहन मायावती न केवल मुख्यमंत्री बनी रहती है, बल्कि प्रधानमंत्री बनने का सपना देख सकती हैं तब फिर रोक-टोक गुरु जी के लिए ही क्यों? बात यहीं खत्म नहीं होती।<!--/show--><span id="more-12"></span>एक जमाना था जब झारखंड के शोषित उत्पीड़ित आदिवासियों के एक मात्र निर्विवाद नेता शिबू सोरेन थे, जिन्हें उनके अनुयायी सस्नेह गुरु जी कहकर पुकारते थे। शिबू सोरेन के तेव्रा जुझारू थे और सभी राजनैतिक दल उन्हें अपनी तरफ खींचने का अपने साथ बनाए रखन का प्रयत्न करते थे। तब से अब तक गंगा यमुना में बहुत सारा पानी बह चुका है और झारखंड की जमीन बेगुनाहों के खून की नदियों से दिल दहलाने वाल कीचड़ में तब्दील हो चुकी है। मगर जिस दर्दभरी दास्तान की बात हम यहां करने जा रहे हैं, वह झारखंड की व्यथा की नही, बल्कि एक कद्दावर नेता के एक ऐसे बौने रूप में बदलने की है, जिस कोई बेचारा मानेने को भी तैयार नहीं।</p>
<p>शिबू सोरेन का नाम आज की नौजवान पीढ़ी को समर्थ या क्रांतिकारी अपनी जमीन या लोगों से जुड़े आदर्शवादी नेता के रूप में याद नहीं रह गया। उनकी पहचान है, एक ऐसे भ्रष्ट खुदगर्ज, कुनबापरस्त अवसरवादी व्यक्ति की, जो साझा सरकार के युग में केंद्र का भयादोहन करने में माहिर है। शिबू सोरेन ने बदनामी कमान के दौर में तब कदम रखा, जब अब तक भारत के इतिहास में सबसे भ्रष्ट प्रधानमंत्री का आक्षेप झेल चुके नरसिंह राव गद्दीनशीन थे।</p>
<p>झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसद रिश्वतखोरी कांड खासा विवादास्पद रहा और संसद के विशेषाधिकार की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अति तकनीकी व्याख्या के कारण ही शिकंजे में फंसे सांसद छुटकारा पा सके थे। जितने भोलेपन से आदिवासियों ने शातिर लोगों द्वारा पेश किया नजराना कबूल किया और फिर इतनी बड़ी रकम को देखने-संभालन का कोई अनुभव न होन के कारण उसे निजी बैंक खातों में जमा करवा दिया था, उस पर तरस ही खाया जा सकता है। एेसे किसी निरीह व्यक्ति को पेशेव्रा मक्कार या जालसाज कोई कैस कह सकता है? इस तरह के घपले-घोटाल की तुलना चारा फर्जीबाड़े या बाढ़ राहत कार्य स करना बेकार है। सत्यम जैसी कंपनी के मालिक राजू साहब का सफेदपोश अपराध तो और भी दूरदराज की चीज है।</p>
<p>इन दो-तीन बातों का जिक्र यहां इसलिए बेहद जरूरी है कि शिबू सोरेने और उनके समर्थक अपने बचाव में इसी तरह के उदाहरण देते रहे हैं। अगर चारा घोटाले में लिप्त होन के आरोपी और अब तक बाइज्जत बरी न हो सके -लालू यादव या ताज एक्सप्रेसवे समेत दर्जनों बड़े सरकारी निर्माण कार्यों का भंडाफोड़ होने के बावजूद बहन मायावती न केवल मुख्यमंत्री बनी रहती है, बल्कि प्रधानमंत्री बनने का सपना देख सकती हैं तब फिर रोक-टोक गुरु जी के लिए ही क्यों? बात यहीं खत्म नहीं होती।</p>
<p>शिबू सोरेन पर हत्या जैसे जघन्य अपराध का आरोप भी है। मगर यहां भी यह तर्क दिया जा सकता है कि उन्हें राजनैतिक कारणों से इस मामले में फंसाया गया है। जिस घटना में उन्हें दोषी पाया गया और दंडित किया गया, उसमें उनकी जिम्मेदारी एक ऐसे जुलूस के नेतृत्व की रही जो आपा खा कर मजिस्ट्रेट की हत्या करने पर आमादा हो गया। भारतीय राजनीति में जितने भी आपराधिक छवि वाले बाहुबली नेतागण या उनके वंशज हैं, सभी अपने बचाव में इसी तरह की बात तोंतारटंत की तरह दोहराते रहते हैं। शाहाबुद्दीन हो या डी पी यादव, मुख्तार अंसारी हो या कोई और, एक बार इस बुनियाद पर अदालत के फैसले को नकारन के बाद हम जंगल राज से बच नहीं सकते।</p>
<p>सबस कड़वा सच तो यह है कि सरकार में बने रहने के लिए या अपने न्यस्त स्वार्थों की रक्षा के लिए या तो दिग्गज नेता समर्थ बाहुबलियों से हाथ मिला लेते हैं या महाबली समझे जाने वाले असामाजिक तत्व अपना जातीय गौरव या सामंती ठसका भूल राजनैतिक हस्तियों के सामने झुकने लगते हैं। मजबूरी का कारण यह है कि भारत के उच्चतर न्यायपालिका आज भी निर्भय और निष्पक्ष है और हाल ही में अपन कई फैसलों में सर्वोच्च न्यायालय यह बात भलीभांति झलका चुका है कि वह धनव्नाा या ताकतवर अपराधियों को बख्शने वाला नहीं, चाहे वह कितनी ही मशहूर हस्ती क्यों न हो।</p>
<p>मृत्युदंड या आजीवन कारावास की तलवार जब अपने या लाड़ले के सर पर लटक रही हो, तब हठ पर डटे रहना कठिन हो जाता है। विडंबना यह है कि अपराधी को क्षमादान का अधिकार सत्तारूढ़ सरकार को है। अगर निर्लज्जता से एकाएक ऐसा करना संभव न हो तब भी मामल की जांच-पड़ताल को पथभ्रष्ट कर मुकदम को हल्का बनाना बिना सरकारी सहयोग के संभव नहीं। यही वजह है कि डी पी यादव हो या राजा भैया उन्हें अब मायावती किसी और राजनैतिक पार्टी- नेता की तुलना में फायदेमंद नज़र आती है।</p>
<p>यूपीए सरकार के साथ लालू जी के नात को पुख्ता रखने में भी यह तर्क असरदार रहा है। जब तक केंद्र में एनडीए सरकार थी, तब तक उन लोगों को जांच-गिरफ्तारी सजा का वैसा खौफ न था, जैसा आज है। बात बाबरी मस्जिद के व्क्ता की ही नहीं मुंबई के 1993 वाले बम धमाकों के बाद भड़के दंगों और गोधरा कांड के बाद गुजरात में फैली वंशनाशक सांप्रदायिक हिंसा की भी है। गुनाहगार को सज़ा मिलेगी ही इसका भरोसा करना सहज नहीं।</p>
<p>मतदाता अपना मन तात्कालिक कारणों, स्थानीय मुद्दों, निजी स्वार्थों के अुनसार बनाते हैं, सरकारों के नसीब बनते-बिगड़ते हैं और इस आवाजाही में पुराने घपले-घोटाले बिसराए जाते हैं आसानी से। शिबू सोरेन जैसे लोगों को इन सब का बेशुमार फायदा हुआ है। वह यह जिद्द पाले रहे कि या तो उन्हें उनके सूब का मुख्यमंत्री बनाया जाय या केंद्र में फायदेमंद अपनी रुचि का विभाग सौंप कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाए।</p>
<p>झारखंड का घनघोर दुर्भाग्य यह रहा है कि उसके भविष्य के बारे में जुबान खोलने का हकदार वहां रहने वाले आम आदमी को नहीं समझा जाता, बल्कि उसके भाग्य का विधाता शिबू सोरेन, लालू यादव बहुत हो गया तो मरांडी, मधु कोड़ा जैसे लोग ही समझे जाते हैं। यही कारण है कि राज्य के प्रशासकों का मनोबल- पुलिस का ही नहीं- बुरी तरह टूटा हुआ है। नक्सलवादी हिंसा पर काबू पाना असंभव हो गया है और बेशुमार खनिज संपत्ति का मालिक होन के बावजूद भी राज्य दरिद्र बना हुआ है।</p>
<p>यदि भूले-बिसरे किसी और सिलसिले में झारखंड का जिक्र होता भी है तो पलक झपकते क्रिकेट की लॉटरी खुलने से अरबपति बने मॉडलनुमा महेंद्र सिंह धोनी के असमाजिक तत्वों द्वारा भयादोहन के कारण। शिबू सोरेन की दर्दभरी दास्तान उनके मौजूदा कष्ट के कारण इतनी क्लेशदायक नहीं जितना इस लगभग शाश्वत सत्य के कारण कि शिबू सिर्फ एक व्यक्ति नहीं प्रतीक और लक्षण हैं उस लगभग लाइलाज बीमारी का, जिससे हमारा सार्वजनिक जीवन आज ग्रस्त है।</p>
<p>(&#8217;हिन्‍दुस्‍तान&#8217; के 28 जनवरी 2009 अंक के संपादकीय पृष्‍ठ पर छपा लेख। लेखक जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में प्राध्यापक और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संकाय के अध्यक्ष हैं।)</p>
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		<title>झारखंड आंदोलन : गवाही इतिहास की</title>
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		<pubDate>Tue, 26 Aug 2008 17:29:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>

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		<description><![CDATA[प्राकृतिक संपदा में देश का सबसे धनी राज्‍य झारखंड आज वास्‍तविक तौर पर सबसे गरीब है। यहां के लोग आज भी जैसे आदिम युग से निकलने के लिये कसमसा रहे हैं। ये वह लोग हैं जो वास्‍तव में झारखंड के बाशिंदें हैं, न कि पूंजीवादी तिकडमों के तहत इस राज्‍य में घुसपैठ करनेवाले बाहरी। ये [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>प्राकृतिक संपदा में देश का सबसे धनी राज्‍य झारखंड आज वास्‍तविक तौर पर सबसे गरीब है। यहां के लोग आज भी जैसे आदिम युग से निकलने के लिये कसमसा रहे हैं। ये वह लोग हैं जो वास्‍तव में झारखंड के बाशिंदें हैं, न कि पूंजीवादी तिकडमों के तहत इस राज्‍य में घुसपैठ करनेवाले बाहरी। ये बाहरी तो धन-धान्‍य से परिपूर्ण हैं। हालात के लिये जिम्‍मेवार कौन? <span id="more-9"></span>यह सवाल अक्‍सर पूछा जाता है। लेकिन, जवाब जिनके पास है उनके पास शब्‍द नहीं, शिक्षा और जागरूकता नहीं। वे आज भी जंगल के आसरे हैं। जबकि, इतिहास गवाह है कि हर हमलावर लोभी शासक इस इलाके को सोने की खान समझता आया। बस, यहां के लोगों को छोड कर। सदियों बाद अलग राज्‍य मिला भी तो किस्‍मत दगा दिये जा रही है। नेता अपने हैं, लेकिन उनकी नीयत में वह अपनापन लुप्‍त है। देखते हैं क्‍या कहता है इस प्रदेश का इतिहास।</p>
<p>इतिहास की गहराई में जाने पर पता चलता है कि झारखंड अलग राज्य की कसमसाहट मुगलों के भारत आगमन पर ही शुरू गयी थी।  मुगलों ने 1385 में इस वन प्रदेश के आदिवासी आबादी पर चढाई की थी। नागवंशी राजा दुर्जन शाल को 1616 में गिरफ्तार कर बारह साल तक बंदी रखा गया। उस दौरान मराठों ने भी आक्रमण किया था। लेकिन, अंग्रेजो के लंबे अरसे के शोषण जनमानस आक्रांत हुई। यहां के पडहा-परगनइत 1769 से 93 तक अंग्रेजों के दमन को किसी तरह सहते रहे। बरदास्त की हदें पार होने लगी तो मालगुजारी वसूली की खिलाफत में अंग्रेजों और उनके एजेंटों पर कबीलाई हमले शुरू हुए। उस दौरान, 1793 में तिलका मांझी का संथाल विद्रोह, 1798 में भूमिज विद्रोह, 1810 में चेरो विद्रोह, 1819 में मुंडा विद्रोह, 1834 में चांदभैरव और बुद्धू भगत का सिपाही विद्रोह, 1875 में सरदार आंदोलन एवं 1895 और 1914 में जतरा भगत का टाना भगत आंदोलन चलता रहा। 1915-38 तक उन्नति समाज का सुधारवादी आंदोलन बौद्धिक क्रांति का काल था।<br />
1938 में जयपाल सिंह के उदय और आदिवासी महासभा का गठन झारखंड आंदोलन का मजबूत पडाव बना था। 1946 में राजनीतिक स्वरूप की शुरूआत हुई प्रोविजनल सरकार के लिये चुनाव प्रक्रिया में हिस्सेदारी से। 1950 में आदिवासी महासभा का पुनर्गठन झारखंड पार्टी के रूप में हुआ। 1952 में, स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनाव में बिहार से 32 सीट जीतकर यह पार्टी प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरी। अलग झारखंड के लिये प्रदर्शन के सिलसिले की शुरूआत 1955 में राज्य पुनर्गठन आयोग के आगमन पर हुई। 1957 के चुनाव में फिर झारखंड पार्टी प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरी। लेकिन, 1962 के आम चुनाव में पार्टी का ह्त्रास हुआ। विधानसभा में सीट घटकर 20 रह गई। और 1963 में झारखंड पार्टी को कांग्रेस में विलय हो जाना पडा। इस दौरान अखिल भारतीय झारखंड और हूल झारखंड दलों का क्षीण प्रभाव भी रहा। 1968 में गठित झारखंड दल भी निष्प्रभावी रहा। इसी दौरान जयपाल सिंह का अस्तकाल भी कहा जाता है। एन ई होरो भी उभरे लेकिन पार्टी विभाजन ने उन्हें भी नहीं बख्शा।<br />
1970 में शिबु सोरेन ने सोनत संथाल समाज का गठन कर सुधारवादी आंदोलन की शुरूआत की। मुख्य उद्देश्य था नशा, साहूकारी और जमीन कब्जाइयों की खिलाफत। अगल राज्य की मांग एक बार फिर 1971 में ए के राय की माक्र्सवादी समन्वय समिति ने शुरू की। इसी वर्ष बिहार सरकार द्वारा छोटानागपुर संथालपरगना स्वशासी विकास का गठन किया गया जो निष्फल साबित हुआ। 1972 में झारखंड पार्टी टूटी और बागुन सुंब्रई एवं एन ई होरो दो गुटों में अलग हो गये।<br />
झारखंड आंदोलन ने एक बार फिर करवट लिया और ए के राय, विनोद बिहारी महता एवं शिबु सोरेन ने मिलकर 1973 में झारखंड मुक्ति मोरचा का गठन किया। आंदोलन तेज हो गया। श्रृंखलाबद्ध घटनाएं प्रस्तुत हैंः<br />
1977 - रांची में शाखा सचिवालय की स्थापना<br />
1978 - सिंहभूम में जंगल आंदोलन<br />
1978 (21 मई) - ऑल इंडिया झारखंड पार्टी का सम्मेलन, 15 अगस्त तक अलग राज्य का अल्टीमेटम, सीपीआई समर्थन में आयी।<br />
1978 (9 जून, बिरसा दिवस) - जेल भरो आंदोलन, सरकारी संपत्ति की तोडफोड, पुलिस की गोली से आंदोलनकारियों की मौत, बंद बुलाने की राजनीतिक की शुरूआत। ेंद्र सरकार की चंद्रमोहन जांच कमिटी ने जांच की और जमीन कब्जाइयों के खिलाफ कार्रवाई के लिये कहा जो बेनतीजा निकला।<br />
1980 - मध्यावधि चुनाव में शिबु सोरेन के झामुमो को बडी सफलता। बागुन सुंब्रई कांग्रेस में शामिल।<br />
1980-90 - क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा विभाग की स्थापना।<br />
1981 - कोल्हान रक्षा संघ के अध्यक्ष नारायण जोंको तथा सचिव के सी हेम्ब्रम ने लंदन में कॉमन वेल्थ से अलग कोल्हान राज्य की गुहार लगायी।<br />
1984 - विनोद बिहारी महतो की जगह निर्मल महतो झामुमो के अध्यक्ष बनाये गये।<br />
1986 (22जून) - ऑल झारखंड स्टूडेन्ट्स यूनियन (आजसू) का गठन।<br />
1987 (08अगस्त) - निर्मल महतो की हत्या। झामुमो से आजसू अलग हो गया।<br />
1987 (सितंबर) - झारखंड समन्वय समिति का गठन।<br />
1989 (23 अगस्त) - ेंद्र सरकार द्वारा झारखंड विषयक समिति का गठन। समिति में शिबु सोरेन, रामदयाल मुंडा, बीपी केशरी, अमर कुमार सिंह, एन ई होरो, विनोद बिहारी महतो, सूर्य सिंह बेसरा, प्रभाकर तिर्की, सूरज मंडल, शैलेंद्र महतो, स्टीफन मरांडी, आदि सदस्य बनाये गये।<br />
1989 (4 सितंबर) - झारखंड विषयक समिति की पहली बैठक। बाद में तयशुदा तारीखों को समिति के सदस्यों ने दुमका, रांची, मध्यप्रदेश, बंगाल और उडीसा का दौरा किया। 31 जनवरी को कलकळाा में हजारों की रैली की।<br />
1989 (1 मार्च) - आर्थिक नाके बंदी की घोषणा<br />
1989 (20-22 अप्रैल तक) - 72 घंटे का सफल झारखंड बंद।<br />
1989 (14 मई) - झामुमो के दो विधायकों को छोड सभी विधायकों ने बिहार विधानसभा से त्यागपत्र दिया।<br />
1989 (7 जून) - गृहमंत्री बूटा सिंह की अध्यक्षता में दिल्ली में बैठक, हिस्सा लिया बिहार के मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह, रामदयाल मुंडा, एनई होरो, विनोद बिहारी महतो, बीपी केशरी, सूर्य सिंह बेसरा आदि मौजूद थे लेकिन शिबु सोरेन की पार्टी ने विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार किया।<br />
1990 (5 जनवरी) - आजसू का तीसरो महाधिवेश, मुंडा द्वारा उद्घाटन।<br />
1990 (24 मार्च) - आजसू का छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से मिला।<br />
1990 (18 मई) - झारखंड विषयक समिति ने ेंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी।<br />
1991 (18 मई) - झारखंड विकास परिषद विधेयक को बिहार विधानसभा की मंजूरी मिली।<br />
1992 (20 मार्च) - झारखंड विषयक समिति की रिपोर्ट संसद में पेश।<br />
1993 (5 मार्च) - झारखंडी नेता प्रधानमंत्री से मिले।<br />
1993 (11 मार्च) - सर्वदलीय झारखंड संघर्ष समिति ने संकल्प लिया - अलग राज्य से कुछ भी कम नहीं चाहिए।<br />
1995 (7 अगस्त) - झारखंड क्षेत्र स्वशाषी परिषद के गठन की राजकीय अधिसूचना जारी।<br />
1995 (9 अगस्त) - अंतरिम झारखंड क्षेत्र स्वशाषी परिषद (जैक) और अंतरिम कार्यकारी परिषद अस्तित्व में आयी। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को शपथ दिलायी गयी।<br />
1997 (4 जुलाई) - बिहार सरकार ने जैक को पूर्ण अधिकार देने की घोषणा की।<br />
1997 (22 जुलाई) - बिहार विधानमंडल में अलग राज्य का प्रस्ताव पारित।<br />
1998-99 - इस दौरान झारखंड वनांचल बिल नामंजूर करने की कोशिश भी विधानसभा में हुई।<br />
2000 (2 अगस्त) - ेंद्र सरकार ने लोकसभा में बिहार राज्य पुनर्गठन विधेयक पास कर दिया।<br />
2000 (11 अगस्त) - राज्य पुनर्गठन विधेयक को राज्य सभा की स्वीकृति मिली।<br />
2000 (25 अगस्त) - राज्य पुनर्गठन विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल गयी।<br />
2000 (1 नवंबर) - झारखंड राज्य के गठन की घोषणा हो गयी।<br />
2000 (14-15 नवंबर, आधी रात) - देश के भूगोल में 28 राज्य के रूप में झारखंड का अभ्युदय हुआ।</p>
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		<title>Political History of Gurujee</title>
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		<pubDate>Tue, 26 Aug 2008 16:55:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[Profile]]></category>

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		<description><![CDATA[











Soren,Shri Shibu






Constituency   :
Dumka-ST(Jharkhand )


Party Name :
Jharkhand Mukti Morcha(JMM)


Email Address :
shisoren@sansad.nic.in



















Father&#8217;s Name
Late Shri Shobaran Soren


 
 


Date of Birth
11.01.1944


Place of Birth
Nemra, Distt. Hazaribagh (Bihar)


Marital Status
Married


Date of Marriage
01 Jan 1962


Spouse&#8217;s Name
Smt. Roopi Soren


No. of Sons
3


No.of Daughters
1


Educational Qualifications
Matriculate
Educated at Gola High School, Hazaribagh (Jharkhand)


profession
Agriculturist


Permanent Address




Qr.No. 14, Sector 1-C, P.O. Ram Mandir,


P.S. City Thana, Bokaro (Jharkhand)


 






 


 


 






Present Address




224, North Avenue,


New Delhi - 110 [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<table style="width: 565px;" border="0">
<tbody>
<tr>
<td align="left" valign="top"><img id="Bioprofile1_Image1" style="height: 140px;" src="http://164.100.24.208/ls/lsmember/13biodata/2917.jpg" border="0" alt="" /></td>
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<table id="Bioprofile1_Datagrid1" style="width: 433px; border-collapse: collapse; border: #fae3c3 2px solid;" border="2" cellspacing="0" rules="all" bordercolor="#fae3c3">
<tbody>
<tr>
<td>
<table style="height: 30px;" border="0" align="center">
<tbody>
<tr valign="top">
<td class="gridheader1" align="center" valign="top">Soren,Shri Shibu</td>
</tr>
</tbody>
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<table style="height: 110px;" border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="darkerb" width="133" align="left" valign="top">Constituency   :</td>
<td class="griditem2" width="300" align="left" valign="top">Dumka-ST(Jharkhand )</td>
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<tr>
<td class="darkerb" width="133" align="left" valign="top">Party Name :</td>
<td class="griditem2" width="300" align="left" valign="top">Jharkhand Mukti Morcha(JMM)</td>
</tr>
<tr>
<td class="darkerb" width="133" align="left" valign="top">Email Address :</td>
<td class="griditem2" width="300" align="left" valign="top">shisoren@sansad.nic.in</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><span id="more-7"></span></p>
<table id="Bioprofile1_DataGrid2" style="width: 568px; color: black; border-collapse: collapse;" border="0" cellspacing="0">
<tbody>
<tr>
<td>
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<td class="darkerb" width="170" align="left" valign="top">Father&#8217;s Name</td>
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<tr>
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<td class="griditem2" align="left" valign="top"> </td>
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<td class="darkerb" align="left" valign="top">Date of Birth</td>
<td class="griditem2" align="left" valign="top">11.01.1944</td>
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<tr height="18">
<td class="darkerb" align="left" valign="top">Place of Birth</td>
<td class="griditem2" align="left" valign="top">Nemra, Distt. Hazaribagh (Bihar)</td>
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<tr>
<td class="darkerb" align="left" valign="top">Marital Status</td>
<td class="griditem2" align="left" valign="top">Married</td>
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<tr>
<td class="darkerb" align="left" valign="top">Date of Marriage</td>
<td class="griditem2" align="left" valign="top">01 Jan 1962</td>
</tr>
<tr>
<td class="darkerb" align="left" valign="top">Spouse&#8217;s Name</td>
<td class="griditem2" align="left" valign="top">Smt. Roopi Soren</td>
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<td class="griditem2" align="left" valign="top">3</td>
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<tr>
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<tr height="18">
<td class="darkerb" width="170" align="left" valign="top">Educational Qualifications</td>
<td class="griditem2" align="left" valign="top">Matriculate<br />
Educated at Gola High School, Hazaribagh (Jharkhand)</td>
</tr>
<tr>
<td class="darkerb" width="170" valign="top">profession</td>
<td class="griditem2">Agriculturist</td>
</tr>
<tr height="18">
<td class="darkerb" width="170" align="left" valign="top">Permanent Address</td>
<td class="griditem2" align="left" valign="top">
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2">Qr.No. 14, Sector 1-C, P.O. Ram Mandir,</td>
</tr>
<tr>
<td class="griditem2">P.S. City Thana, Bokaro (Jharkhand)</td>
</tr>
<tr>
<td class="griditem2"> </td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2"> </td>
</tr>
<tr>
<td class="griditem2"> </td>
</tr>
<tr>
<td class="griditem2"> </td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr height="18">
<td class="darkerb" width="170" align="left" valign="top">Present Address</td>
<td align="left" valign="top">
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2">224, North Avenue,</td>
</tr>
<tr>
<td class="griditem2">New Delhi - 110 001</td>
</tr>
<tr>
<td class="griditem2">Tels. (011) 23093857, 23093861</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2"> </td>
</tr>
<tr>
<td class="griditem2"> </td>
</tr>
<tr>
<td class="griditem2"> </td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td class="darkerb">Position Held</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table id="Bioprofile1_Datagrid3" style="width: 570px; color: black; border-collapse: collapse;" border="0" cellspacing="0">
<tbody>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">1971 onwards</td>
<td class="griditem2">General Secretary, Jharkhand Mukti Morcha (J.M.M.)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">1980</td>
<td class="griditem2">Elected to 7th Lok Sabha</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">1986 onwards</td>
<td class="griditem2">President, J.M.M.</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">1989</td>
<td class="griditem2">Re-elected to 9th Lok Sabha (2nd term)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">1991</td>
<td class="griditem2">Re-elected to 10th Lok Sabha (3rd term)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170"> </td>
<td class="griditem2">Leader, J.M.M. Parliamentary Party</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">1996</td>
<td class="griditem2">Re-elected to 11th Lok Sabha (4th term)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">8July 1998-18July 2001 and 10April 2002-2June 2002</td>
<td class="griditem2">Member, Rajya Sabha</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">2002</td>
<td class="griditem2">Re-elected to 13th Lok Sabha (5th term)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">May 2004</td>
<td class="griditem2">Re-elected to 14th Lok Sabha ( 6th term)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">May 2004</td>
<td class="griditem2">Union Cabinet Minister, Coal and Mines</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">July 2004</td>
<td class="griditem2">Resigned from Union Council of Ministers</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">2 March 2005-11 March 2005</td>
<td class="griditem2">Chief Minister, Jharkhand</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">29 January 2006-28 November 2006</td>
<td class="griditem2">Union Cabinet Minister of Coal</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">29 November 2006</td>
<td class="griditem2">Resigned from Union Council of Ministers</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
<tr>
<td>
<table border="0">
<tbody>
<tr>
<td class="griditem2" width="170">2008</td>
<td class="griditem2">Leader of JMM in Lok Sabha</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
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